दुनियाभर के शेयर बाजारों में गुरुवार और शुक्रवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। अमेरिकी बाजारों में मजबूत उछाल आया, GIFT Nifty 250+ पॉइंट्स ऊपर दिखा और बैंकिंग शेयरों में शानदार खरीदारी देखने को मिली। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह रही अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबर।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है — क्या डील वास्तव में हो गई है या सिर्फ डील होने की उम्मीद पर बाजार दौड़ रहा है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता लगभग तैयार है और जल्द ही साइन किया जा सकता है। वहीं ईरान ने साफ कहा है कि अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत जारी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ड्राफ्ट समझौते में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:
Strait of Hormuz को तुरंत खोलना
ईरान पर कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत
60 दिनों के संघर्षविराम (Ceasefire) का विस्तार
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत
वैश्विक तेल आपूर्ति को सामान्य करना
यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो:
कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है
वैश्विक सप्लाई चेन सामान्य हो सकती है
महंगाई का जोखिम घट सकता है
भारत जैसे तेल आयातक देशों को फायदा मिल सकता है
इसी उम्मीद में Brent Crude में तेज गिरावट आई और इक्विटी मार्केट्स में खरीदारी बढ़ी।
इतिहास गवाह है कि पिछले कुछ हफ्तों में कई बार ट्रम्प प्रशासन ने "डील करीब है" कहा, जबकि ईरान ने उन दावों को खारिज या कमजोर बताया। अभी तक किसी भी पक्ष ने अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। (Reuters)
यानी फिलहाल बाजार उम्मीद पर दौड़ रहा है, हकीकत पर नहीं।
अगर डील साइन हो जाती है तो बैंकिंग, ऑटो, एविएशन और आयात-निर्भर सेक्टरों को फायदा मिल सकता है। लेकिन यदि बातचीत टूटती है या नई सैन्य कार्रवाई होती है तो बाजार में तेज मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है।
इसलिए केवल हेडलाइन देखकर निर्णय लेने के बजाय अगले कुछ दिनों में आने वाली आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना ज्यादा जरूरी होगा।
फिलहाल US-Iran Deal एक "Done Deal" नहीं बल्कि "Proposed Deal" है। बाजार ने पॉजिटिव परिणाम को पहले ही प्राइस करना शुरू कर दिया है, लेकिन अंतिम सच्चाई आने वाले कुछ दिनों में ही सामने आएगी।
क्या यह वास्तविक शांति समझौता है या सिर्फ बाजार को राहत देने वाली एक कहानी?
इस सवाल का जवाब अभी बाकी है.
