भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। Sensex ने एक समय 1700 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाई, जबकि Nifty भी मजबूती के साथ ऊंचे स्तरों पर कारोबार करता दिखा। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते (US-Iran Deal) की खबरें रहीं।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच एक ड्राफ्ट समझौते पर सहमति बनने की संभावना बढ़ गई है। इस प्रस्तावित समझौते में ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत, Strait of Hormuz को फिर से पूरी तरह खोलना और आगे परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत का रोडमैप शामिल बताया जा रहा है। हालांकि अभी अंतिम मंजूरी बाकी है और दोनों देशों ने औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं की है।
दुनिया के लगभग 20% समुद्री तेल व्यापार का रास्ता Strait of Hormuz से होकर गुजरता है। पिछले कई महीनों से इस क्षेत्र में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई थी। अब यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाता है और ईरानी तेल की सप्लाई फिर से सामान्य हो जाती है, तो वैश्विक स्तर पर तेल की उपलब्धता बढ़ सकती है। इसी उम्मीद में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई।
तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है। इससे महंगाई का दबाव कम हो सकता है, चालू खाता घाटा नियंत्रित रह सकता है और कंपनियों की लागत घट सकती है। यही कारण है कि निवेशकों ने बैंकिंग, ऑटो, फाइनेंशियल और कंजम्प्शन शेयरों में जमकर खरीदारी की।
केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी इस खबर का सकारात्मक असर देखने को मिला। अमेरिकी शेयर वायदा बाजार, एशियाई बाजार और यूरोपीय सूचकांक सभी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। तेल की कीमतों में 4-5% तक की गिरावट ने निवेशकों का भरोसा और बढ़ाया।
हालांकि बाजार ने संभावित डील को लगभग तय मानकर जश्न मनाना शुरू कर दिया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है। ईरान की ओर से भी कहा गया है कि बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम निर्णय और औपचारिक हस्ताक्षर बाकी हैं।
ऐसे में निवेशकों को यह समझना होगा कि यदि किसी कारण से बातचीत विफल होती है या समझौते में देरी होती है, तो बाजार में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है।
फिलहाल बाजार इस उम्मीद पर दौड़ रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों पुराना तनाव कम होने जा रहा है। यदि यह समझौता वास्तव में हो जाता है, तो तेल की कीमतों में और राहत मिल सकती है तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी यह सकारात्मक संकेत होगा। लेकिन जब तक आधिकारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक बाजार की इस तेजी में थोड़ा सतर्क रहना भी जरूरी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या यह सिर्फ उम्मीदों की रैली है या फिर वास्तव में एक ऐतिहासिक डील होने जा रही है? इसका जवाब आने वाले कुछ दिनों में मिल जाएगा।
